न देख पाने की लाचारी के बावजूद दोनों ने परिस्थितियों के आगे कभी हार नहीं मानी. सोहन और बिजेंदर रेड क्रॉस भवन में कुर्सियां बुनने का काम करते है. ये रोजाना एक-एक कुर्सी तैयार करते हैं, उसके बाद कुर्सियों को सरकारी मुख्यालयों तक पहुंचाया जाता है.from Latest News हरियाणा News18 हिंदी http://bit.ly/2TuA6oJ
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